Saturday, October 18, 2014

दीपावली








साल भर के इंतज़ार के बाद 
दीपावली का पर्व आया 

सज गए सारे बाजार
रंगोली ने किया मोहित 

रौशनी जगमगाई घरों मैं 
जब रंग बिरंगे बिजली के लड़ियाँ चमकी

हर तरफ दीयों की धूम है 
दूर भगण है  अंधकार को 

खील, पठाके , चीनी के खिलोने 
बुला रहे पूजा के शगुन के लिए 

तोहफे ही तोफे हर नुक्कड़ पे 
मिठाई, मेवा हर दूसरे  चौक पे 

गैंदे  और पत्तियों के हार लहराए 
करना था आगमन लक्ष्मी गणेश का 

कई दिन पहले ही हुए बच्चे मस्त मलंग 
पाठकों के साथ लूटी मस्ती 

रात होने से पहले ही हर घर जग मग उठा 
घर घर में मैं हुई ईश्वर की  पूजा 

  एक दुसरे को तोहफे बांटे 
रूठे रिश्ते भी जाग उठे 

उमंगो की पतंग लहराई 
अानन्द ही आनद छलका हर तरफ 

आओ सब मिलकर कसम ले 
फेक निकालें मन की गन्दगी 

एक होकर जीए  सच्चाई से 
दूर भागएं द्वेष लड़ाई को